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बारिश, बादल और झूलोँ के मौसम होँगे सावन मेँ

 

 

बारिश, बादल और झूलोँ के मौसम होँगे सावन मेँ.

एक तुम्हारे बिन लेकिन कितने ग़म होंगे सावन मेँ.

 

खेत मका का, घाट नदी का, पनघट,महुआ-छाँव घनी;

ये सब तेरी ही यादोँ के एल्बम होँगे सावन मेँ.

 

आँखोँ के बादल बरसेँगे, ज्वार उठेँगे सीने मेँ;

हर दामन-ए-अहसासे-दिल पुरनम होँगे सावन मेँ.

 

मेरा प्राण-पपिहरा हर पल पिउ-पिउ बस रटता होगा;

बिन तेरे जाने कितने बेबस हम होँगे सावन मेँ.

 

हरियाली कजरी गाएगी, गोद भरेगी धरती की;

माज़ी के वे लमहे 'महरूम' मरहम होँगे सावन मेँ.

 

 

 

देवेन्द्र पाठक 'महरूम'

 

 

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