tarasingh
Administrator Dr. Srimati Tara Singh


www.swargvibha.in






बदलता वक़्त

 

 

दुःख की घड़ी में कोई काम ना आया
सुख में सबने यहाँ हाथ मिलाया
चढ़ते सूरज ने यहाँ सलाम पाया
गहनाया चाँद किसी को ना भाया
सब मिलते हैं यहाँ मुखौटा चढ़ाए
चेहरे पे अपने एक चेहरा सजाए
मुँह-देखे की बात यहाँ करते हैं लोग
फिर पीठ पीछे से वार करते हैं लोग
पैसा बन गया है दीन-ओ-धर्म
पैसे से ही तोले जाने लगे हैं कर्म

 

 


(इरम कमाल)

 

 

 

HTML Comment Box is loading comments...