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बैठा था चुप चाप सा औचक ही कुछ याद आया

 

 

बैठा था चुप चाप सा औचक ही कुछ याद आया.

याद कर उसे न जाने क्यों रोना आया .

भूल गया था जिसको आज फिर वो याद आया .

कौन था वो अपना जिसे पीछे छोड़ आया.

हर वक्त दिल के करीब रहता था .

मै कुछ न बोलू फिर भी दिल की बात

फट से समझ लेता था .

दिन हो या रात हर वक़्त साथ रहता था .

कोई न हो साथ तो वो ही रहता था .

दिल के खालीपन को वो ही भरता था .

आज फिर मुझसे मिलने आया है वो.

इस भाग–दौड़ की दुनिया में क्यों भूल ,

गया मैं उसको क्या आज अकेला हूँ ,

इसलिए याद आया है वो .

हमसाया है वो ,

आज अकेला हूँ इसलिए फिर याद आया है वो .

 

 

Dharmendra Mishra

 

 

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