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बरसात से याद आती है

 

 

बरसात से याद आती है,
या यादों से बरसतीं हैं /आँखे

 

वो भी तो आंखो को/भीगो देगी / सावन की पहली बूँदो में

 

ना आए याद उसे तो बस इतना सा महसूस करने को मजबूर कर देगा वो एहसास/ जब हम अपने आप को भूल कर/ अंतरात्मा की अंत त:
गहराई में उतर कर/ प्यार की परिभाषा को समझते थे

 

 

बहुत खूब हैं यह सावन झूम झूम के अपने साथ रूलाता है
और उस से प्यार करके/ प्यार पाकर भी दूर रहना

 

उसकी अंतरात्मा भी तरसती है/ या सिर्फ सहमीं हैं आँखें
बरसात से याद आती है,
या यादों से बरसतीं हैं / आँखे

 

 

 

~ कवि बृजमोहन स्वामी "बैरागी"

 

 

 

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