swargvibha banner

होम रचनाकार कविता गज़ल गीत पुस्तक-समीक्षा कहानी आलेख E-Books

हाइकु शेर मुक्तक व्यंग्य क्षणिकाएं लघु-कथा विविध रचानाएँ आमंत्रित

press news political news paintings awards special edition softwares

 

 

देखकर तुमको आज
फिर भूली कहानी याद आई
साथ साथ कितने ही पल
गुजारे थे हमने
वो पेड की छांव तले बैठना
वो भींगते हुए दफतर से लौटना
कभी रिक्शे के इन्तजार में तुम्हारा वहाँ रहना
कभी समय से पहले ही मिलन स्थल
पर आ कर ........बेचैन होना
आज जब ये बातें याद आ रही है तो
और भी कचोट उठता है दिल
कभी तो साथ रहने की खाई थी कसमें हमने
पर आज
याद करने को मुकरता है दिल
बेवफा हो तुम, बेवफाई तुम्हारी फितरत
फिर,मैंने भी वफादारी की खाई थी कसमें
तुम्हें भूला ही नहीं तो
क्यों करूँ याद

your comments in Unicode mangal font or in english only. Pl. give your email address also.

 

HTML Comment Box is loading comments...