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भ्रष्ट मन

 

 

कर लो भ्रष्टोँ को मुट्ठी मेँ दे तिलांजली मन के अरमान ,
अगले पग कांटे न चुभे भर लो देश प्रेम का आहवान ।

 

मन व्याकुल हो चला देख गाँधी , नेहरु का परवान ,
याद करवटे ले रहा सुभाष , भगत , सावरकर का बलिदान ।

 

जलियांवाला वाग देश सेवा का लिखा इतिहास ,
पल्लवित , प्रफुल्लित भारत बटने को है तैयार ।

 

अब भी पहचान ले नागफनी का फनकार ,
है कटु सत्य कहने वाले पालनहार - व्यभिचार ।

 

सागर । नदी , नाले बन न जाए ऐसी संस्कृति पुनः दुहरा , समझ भ्रष्टोँ के
करतूत हो न हो रेगिस्तान भी बन जाए श्मशान ।

 

अखंड भारत बना रहे , विश्व वेदांत का परिचायक ,
अब न बँट पाये ये धरा , वेद पुराण का नायक ।

 

सागर मंथन दुहराना पड़े यह समझ देशहित के नेता ,
स्वयं को एक दिन जानना होगा ,
है भारत देश विधाता ।

 

 

 

संजय कुमार अविनाश

 

 

 

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