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बम ब्लास्ट, वाराणसी (१८ नवम्बर २०११)

(संसार, नही पूरे ब्रह्मांड सबसे बुज़दिल यदि कोई है तो वह हैं यही आतंकी हैं)

पूजा में लीन भक्त, माँ की गोद में बैठी मासूम बच्ची, ऐसे लोगो पर छुप कर घात

अरे बेशर्मो छुप कर बैठ जाते हो फिर अपनी माँ के पल्लू में करके ऐसी खुराफात

दूसरों के वाई-फाई हैक कर भेजते हो ईमेल, दिखाने को अपनी धाक

तुम्हे तुम्हारे आकाओं ने ना कलम दी, ना सलेट दी ना बत्ती और ना चाक

चन्दे के पैसे से डिब्बे का दूध पीने वालों तुम क्या जानो

क्या है भारत माँ की शान, खोलो अपना टीवी और देखो

हिन्दू माँ का दूध पिया है जिसने, क्या बच्चे, क्या बुढ़े और क्या जवान

किस शान से कर रहे हैं अपनी माँ गंगा का सुबह सवेरे से ही जय गान

अरे बुजदिलो तुम मरना तो क्या जीना भी नहीं जानते

अपनी माँ, मुल्क और कौम को बदनाम करने वालों

कूढ़े कचरे की पेटी में, बम छुपा कर रखने वालों

जिस दिन भी सामने से वार करने आओगे

मार कर इन्ही कचरे की पेटी में डाल दिये जाओगे

कचरा बीनने वाले तो उस कचरे-पेटी को छुएंगे नही

जानवर भी तुम्हारी बोटीयों पर थूक कर ही जाएंगे

जो तुम्हे सिखाते है कत्ल-ओ-जिहाद करो जन्नत पाओगे

ये कचरा-पेटियाँ ही तुम्हारा जहनुम ओ जन्नत है

यह तो तुम मरने के बाद ही जान पाओगे

(प्रमोद सरीन)

 

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