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एक छोटी सी बदली

 

 

आकाश में सूर्य नारायण चमक रहे थे-
अपनी सम्पूर्ण तेजश्विता से।
वे कर रहे थे भीषण ताप का उत्सर्जन और-
दमक रहे थे आग के गोले सा।
असह ताप से नभचर, जलचर और थलचर-
कर उठे त्राहि त्राहि।
एक छोटी सी बदली देखकर लोगों का दुख-
हो गई उद्धत करने को दूर लोगों का संताप।
रोक सकती सूर्य के रथ को-
यह नहीं थी उसकी सामर्थ्य।
परन्तु कुछ करने की प्रबल भावना के चलते,
वह आ गई आग उगलते सूर्य के समानान्तर-
और रोक दिया रवि किरणों का भू पर आगमन।
उसने ढक दिया सूर्य को-
मंद पड़ गई उसकी चमक और घट गई उत्तप्ता।
क्षणिक ही सही लोग करने लगे अनुभव सितलाई का।
महाभारत के निर्णायक युद्ध में भी श्री यदुनाथ ने,
लेकर छोटी बदली का सहारा,
करा कर पार्थ से जयद्रथ वध-
बदल दिया युद्ध का परिणाम।
ओ आकाश की छोटी बदली तेरे कुछ करने की सदेच्छा को-
शत शत प्रणाम।

 

 


जयन्ती प्रसाद शर्मा

 

 

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