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चोर दिल, तुम्हें चाहता, मैं क्या करूं ?

 

 

चोर दिल
तुम्हें चाहता
मैं क्या करूं ?
नाम तेरा लेता है
लेकर के मुझसे कहता है
प्यार मुझको हो गया
मै क्या करूं /
चोर दिल
तुम्हें चाहता
मैंनें सोचा
तुम भी तो
सब हाल इसका
अब जान लो
जान हो जिसकी हो तुम
चोर दिल पहचान लो
है चतुर तुमसे न कहता
पर मन की हालत जान लो

चोर दिल
तुम्हें चाहता
मैं क्या करूं ?

 

मिलने को घर आता है
खुश होता, बहुत शर्माता है
प्यार है तुमसे बहुत
गीतों में गा के सुनाता है
नजरों की बाते
सुनाकर , मन ही
मुस्काता है
है बडा चित चोर
चंचल है बहुत
अब इसे पहचान लो
चोर दिल
तुम्हें चाहता
मैं क्या करूं ?


मैंनें जब तब पूछा है
मुझको बताता है नहीं
प्यार का दोस्तों से
कोइ राज कहता है नहीं
मद भरे नयनों से कहना
होठों को चुप चाप रखता
हाले दिल पहचान लो
चोर दिल
तुम्हें चाहता
मैं क्या करूं ?


पहले तो रोका था इसको
मैंने ने भी टोका था इसको
अब हकीकत जान लो
मेरे प्यार को पहचान लो
चोर दिल
तुम्हें चाहता
मैं क्या करूं ?

 


देवेंद्र नाथ पांडे “देव पंडित”

 

 

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