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दीवानी

 

 

अपनी खिड़की से
ताकता है मुझे।
लोग कहते हैँ
चाहता है मुझे॥

 

 

गोया पंछी हूँ मैँ
शिकारी वो
तमाम तरह
फाँसता है मुझे॥

 

 

हो न जाऊँ
कहीँ मैँ दीवानी।
बस यही दर्द
शालता है मुझे॥

 

 

इश्क मेँ जान
भी हाजिर है॥
जूता नफरत का
काटता है मुझे॥

 

 

कह दो मनीस
खुलके मिले।
उससे ताउम्र
वास्ता है मुझे॥

 

 

- मनीस पाण्डेय

 

 

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