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" धर्म-युद्ध "

 

 

युद्ध है ये धर्म का ,
अधर्म ही विधान है;
पुराण या कुरान ,
कौन दोनों में महान है ..?

 

 

धर्म को चढ़े बलि ,
हो नरबली या पशुबली ;
वैमनस्यता की इस अग्नि में ,
मानव आहूति विद्यमान है,
युद्ध है ये धर्म का ,
अधर्म ही विधान है..!!

 

 


साकार ,निराकार में कौन शक्तिमान है ,
धर्म की म्यान में अधर्म का कृपाण है ;
धड़ कटे , लहू बहे
क्या मानव -शीश मुंड पर,
अधिष्ठापित धर्म ज्ञान है ;
अरित्व या प्रमाथ ,
क्या ये धर्म का विधान है ..??
युद्ध है ये धर्म का ,
अधर्म ही विधान है ...!!

 

 


आधार सृष्टिकृति का स्वयं की प्रशंसा नहीं ,
देव या ख़ुदा को बंदगी की मंशा नही;
मानवता के प्रमाथ से ख़ुदा भी हैरान है ,
धर्मग्रन्थ और पंथ का ये घोर अपमान है ,
युद्ध है ये धर्म का ,
अधर्म ही विधान है ..!!!

 

 

वरुण प्रताप सिंह ' संकेत '

 

 

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