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दिल बेचारा क्या करे

 

 

मिल के, भी मिलते नही
नजरो से कुछ कहते नही
दिल बेचारा क्या करे
अब हाले दिल कहते नही
मेरी एक भी सुनते नही
अब मिलके भी, मिलते नही
नजरो से, कहते नही
चलते चलते कल मिले
मुझे चोर कह के हस दिये
मेरे मन के मीत मुझसे
मिलके भी जब न मिले
हाल दिल समझा दिये
चुप रह के भी चुप न रहे
ओ मिल के, भी मिलते नही
नजरो से कुछ कहते नही

 


देवेंद्र नाथ पांडेय "देव पंडित”

 

 

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