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डोली

 

 

इन्तज़ार की वेदी पर
अरमान हमारे जलते हैं
चौखट को पकड़े हम
दूर निहारा करते हैं
सरकते समय को हम
मुट्ठी में पकड़ा करते हैं
कभी जिससे था प्रेम
अब वही आइना डराता है
समय हमारे चेहरे पर
निशान छोड़ता जाता है
बालों की रंगत बदल गयी
पर क़िस्मत हमारी ना बदली
डोली किसी की देख कर
हँसती है अब ये पगली

 

 


(इरम कमाल)

 

 

 

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