tarasingh
Administrator Dr. Srimati Tara Singh


www.swargvibha.in






एक बिटिया हो जैसे निर्धन की

 

 

एक बिटिया हो जैसे निर्धन की ,
पीर दिन-दिन जवान होती है|

 

दर्द से जंग में यहाँ हर पल,
ज़िंदगी लहू लुहान होती है|

 

सब्र का हद से गुज़र जाना ही,
आसुओं की जुबां होती है|

 

"आरसी" गम की आंच से गुज़री,
हर घड़ी इम्तिहान होती है| --आरसी

 

 

HTML Comment Box is loading comments...