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इश्क

 

 

इश्क बनाने पे आये, बहुत कुछ बना सकता है ।
दरिये दूध के ना बहाये कभी, तो क्या हुआ ?
मुहब्बत के लिए पानी को आबे-जमजम बना सकता है ।
पाक मुहब्बत की तलाश करते रहो मेरे दोस्तों !
घटे नहीं पास से, तराश के इंसान बना सकता है ।
ये वो उल्फत है, जहां भर की खुशियाँ दे दे,
जो ना मिले, हर खुशी को फिर वो झूठा बना सकता है ।
बस……… . इसी जद्दोज़हद का नाम है ज़िन्दगी !
इश्क....... जिन्दादिली से जीना भी सीखा सकता है ।

 

 

-------------अनुराग त्रिवेदी एहसास

 

 

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