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इन निर्जीव काले शब्दों से कैसे तेरा गुणगान लिखूंगा

 

 

इन निर्जीव काले शब्दों से कैसे तेरा गुणगान लिखूंगा
ये शब्द अल्प हैं मेरे प्रिये ! कैसे मैं मधुगान लिखूंगा

 

तेरे कजरारे मधुमय नयनों में
सखियों संग नर्तन की मस्ती
यौवन की निदियाई पलकों पर
सजी नीलम बस्ती का गान लिखूंगा

 

मोतियों की सजी है माला हास समय जो दर्शन देती
झरती कलिकाओं का होंठों से, मैं पूरा श्रृगार लिखूंगा

 

साथ मेरे पगपग पर हो तुम
जीवन के अंधियारे पथ पर
मैं लहराते तेरे सुंदर पट पर
इक लहराती मुस्कान लिखूंगा

 

सब नर्तन शब्द करेंगे मेरे , तेरे सीने की धड़कन पर
ये शब्द अल्प हैं मेरे प्रिये ! कैसे मैं मधुगान लिखूंगा

 

मचल उठे अरमान मेरे सब
तेरे नयनों का मधुरस पीकर
पलकों से झरती स्याही से
सपनों का अहसास लिखूंगा

 

धुली सुबह में खिले नयन से, सावन की मस्ती का
ये शब्द अल्प हैं मेरे प्रिये ! कैसे मैं मधुगान लिखूंगा

 

बैठी रहो पास प्रिये ! मेरे
मेरे जीवन की अधिकारी
सब उल्लास इस जीवन का
तुमको मैं अर्पण कर दूंगा

 

सारी पीड़ा पीकर तेरी, सब उल्लासों के गान लिखूंगा
ये शब्द अल्प हैं मेरे प्रिये ! कैसे मैं मधुगान लिखूंगा

 



केदारनाथ "कादर"

 

 

 

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