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वो नन्हाँ सा हँसता खिलखिलाता फ़रिश्ता

 

 

वो नन्हाँ सा हँसता खिलखिलाता फ़रिश्ता ,
ज़िन्दगी में खुशी की वो एक फ़ुआर,
खिलोनों के बीच में बेंठा ,बुनता एक निराली दुनिया,
बड़े लोगों- सी बातें बनाता , वो सबको हँसाता,
है कृष्णा का एक स्वरुप,
अपनी सारी डिमांड प्यार से रखता, हमें मनाता
कभी नए कपड़े , कभी नए जूतों से खुश होता
कभी माँगता चॉकलेट , तो कभी नए खिलोने,
नये वस्त्र धारण किये, लगता कृष्ण सा मनमोहक
घुटने चलता, हकलाता, डांस करता,
रखता सबका पूरा ख्याल,
प्यार और मासूमियत से भरा,
उस तोते में है मेरी जान,
जितना करू उसके लिए, लगता मुझे उतना ही कम,
जिन्दगी में बहुत कुछ सिखाता,
परेशानियों का हँसकर सामना करना,
"जिंदगी कितनी सुँदर है, जीना है पूरी तरह" -एहसास वही मुझको कराता
मेरी दुनिया में उजाला वो लाता,
भुल गयी मैं अपने सारे ग़म उसकी दुनिया में खोकर,
खुशकिस्मत है वो, जिसके घर में हो एक छोटा सा फ़रिश्ता,

 

 

 

 

ज्योति चौहान

 

 

 

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