tarasingh
Administrator Dr. Srimati Tara Singh


www.swargvibha.in






इम्तिहान

 

 

 

मेरी जिंदगी ने इम्तिहान बहुत है लिए ,
खुशियों के लम्हों में ग म छोड़ है दिए !
मैंने मिलन की आशा की थी मगर,
एक लम्बी जुदाई इसने छोड़ दिए !
मैंने रोशनी की चाहत की थी ,
पर अँधेरा घना इसने छोड़ दिए !
मैंने पुष्पों का आँचल चाहा था ,
काटो के दामन इसने छोड़ दिए !
मैंने अधरों पर मुस्कान चाही थी,
आखो में अश्रु इसने छोड़ दिए !
मेरे नैनो में ख्वाबो की चाहत थी,
जीवन में परछाई छोड़ दिए !
मैंने महफ़िल की चाहत की थी ,
पर दामन में तन्हाई छोड़ दिए !
मैंने गुलशन की चाहत की थी,
एक लम्बी वीरानिया छोड़ दिए !
अमृत का प्याला चाह था,
विष का प्याला छोड़ दिए !
मैंने अशाओ की राहे चाही
निराशाओ की डगर छोड़ दिए !
इसे समझने की कोशिश की थी,
अब खुद मै इसमे उलझ गयी !
इसके इम्तिहानो से अब ऐसा लगता है ,
मेरा जीवन एक सवाल बन बैठा है !
सवालो के जवाब चाहती हु मै ,
गिरकर फिर संभलना चाहती हु मै !
है उम्मीद मुझे है यकीं मुझे ,
एक दिन सफल हो जाउंगी !
अपने जीवन को जी भर के जी लुंगी !!

 

 

 

meri ye kavita mere swargiya pitaji ki yaad gari me

 

Rohini Tiwari

 

 

 

HTML Comment Box is loading comments...