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मैने इंतजार किया

 

 

दिन के ढलने सूरज के डूबने।
तारो के आने तक मैने इंतजार किया।
बस तेरा इंतजार किया।

 

बैचेन थी अपने गीत तुम्हे सुनाने को।
पर तेरे गुनगुनाने तक मैने इंतजार किया।

 

दूर थे तुम मजबुर थे तुम।
चाहती थी तुमसे मिलना बहुत।
पर तेरे पास बुलाने तक मैंने इंतजार किया।

 

रूठकर जाते लगा है हर काई मुझसे।
समझ नही आता मनाऊँ भी तो कैसे।
मिलना बिछडना खोना पाना ही जिंदगी है।
तेरे मुझे समझाने तक मैने इंतजार किया।

 

दुखी चुप खामोष थी मै।
कुसूरवार समझा सबने पर निर्दोष थी मै।
चाहती थी रोना तेरे कांधे पर सिर रखकर।
तेरे मुझे हँसाने तक मैने इंतजार किया।

 

वो कसमे वो वादे वो चाहत की बाते।
वो मिलना हमारा चाहे दिन हो या रातें।
वो हसीन लम्हे प्यार के भूले नही भूलते मुझसे।
पर तेरे इन्हे भुलाने तक मैने इतजार किया।

 


लक्की जैन

 

 

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