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मेरे जाने के बाद

 

 

एक मैं हु अभी
फिर मेरे जाने के बाद क्या करोगी

 

जब जब भरोगी आहें
एक मुझे ही तो याद करोगी

 

गुज़रे कल की तरह
बीते पल की तरह

 

लेकर जब तुम बैठोगी उन ख़तो को
हर एक पन्नें मैं
फिर तुम देख मुझे क्या करोगी

 

कुछ दरीचों से झांकती होगी
कुछ नदी किनारो की राते

 

पूछेगी जब पता मेरा
फिर तुम क्या करोगी

 

वो मंदिर के सामने
वो मस्ज़िद की नमाज़

 

गुजरोगी जब तुम गली से मेरी कभी
फिर तुम क्या करोगी

 

मेरे जाने के बाद
लिखोगी गर फिर ख़त तुम मुझ को

 

गर ना मिला पता डाकिये को
फिर तुम क्या करोगी

 

मेरे जाने के बाद
मैं ना मिला तुझ को

 

फिर तुम क्या करोगी

 

 

©
अजनबी राजा

 

 

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