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जिहादी

jihadi

 

 

 

अंधेरों से दुश्मनी कई दुश्मन बना देती है,
सरफीरी हवाएँ अक्सर दीया बुझा देती है।

 

सक्रांत की कटी पतंगों से मैंने जाना है,
बुरी सोहबत ऊंचे किरदार गिरा देती है।

 

परिंदों को तालिम उड़ने की कौन देता है?
पंखों की छटपटाहट उड़ना सीखा देती है।

 

किताबों के साथ मैं रस्ते भी पढ़ लेता हूँ,
किताबों से ज्यादा ठोकर सीखा देती है।

 

आशिक और जिहादी मुझे एक से दीखते हैं,
नादानी इन दोनों को काफ़िर बना देती है।

 


©डीजे

 


सक्रांत-Makar Sakranti,
सोहबत- company, संगति,
जिहाद-a war or struggle against unbelievers.
काफ़िर- जो ख़ुदा को नहीं मानता, a person who is not a Muslim (used chiefly by Muslims).

 

 

 


नाम-दिनेश कुमार 'डीजे'

 

 

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