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कामना

 

 

समग्रता की
आपसी सौहार्द की
दूर हो-
वैर-भाव
मिटे कटुता
गिरे आंगन में
दरार डालने वाली दीवार
छटे दूरियाँ
बढ़ें नजदीकियाँ
विस्तृत हो अपनापन।
ऐसी महत्वाकांक्षा नहीं
जिसमें दरकार हों
ढेर सारी भौतिक वस्तुएँ
जिन्हें पाने लिए
भाई-भाई को जुदा
होना पड़ता है।
आओ-
मिलकर बहार बांटे
प्यार उड़ेल दे।
भारत महाने है
और
भारतवासी महानतम्
मजहब नहीं सिखाता
आपस में बैर रखना
इस सूक्ति को
हम सबको याद रखना
कामना है-
सोना उगलने वाली इस
देश की महान धरती
हमारे लहू से रक्तरंजित
न हो।।।

 

 


-डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी

 

 

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