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आज कलम उठाई है यारो,,दिल से आवाज़ आई है

 

 

आज कलम उठाई है यारो,,दिल से आवाज़ आई है


 
सुबह की ताजा हवाओं में
जब बारिश घुलमिल जाती है
तूं पार समंन्दर होती है
सांसों को खुशबू मिल जाती है।

 


 
तन्हाई के इस आलम में
जब बदरा गरजने लगता है
आंखों से बरसने लगता है
तो दिल "मिलन" को तरसने लगता है।


 


कोहरे की धुंधली सुबहों में
जब मौसम सर्द बढ जाता है
दिल का दर्द बढ़ जाता है
रूह कांपने लगती है, होंठों पर जर्द़ बढ जाता है

 

 

बृजमोहन स्वामी

 

 

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