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ख़ुद्दारो की खुद्दारी देख ली

 

 

ख़ुद्दारो की खुद्दारी देख ली।

मैन ये दुनियादारी देख ली।।

तारीफ करो कुछ भी ऐसा नही यहां।

ज़िंदा मुर्दों की आज लाचारी देख ली।।

बिन रिश्वत कुछ भी नही होता यहां।।

आज मैंने आदत ये सरकारी देख ली।

गिरे हुए की गिराने आते है सभी।

लोगो की ये समझदारी देख ली।।

 

 

अंजनी कुमार मिश्रा

 

 

 

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