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ख्वाब

 

 

मेरे ख्वाबों में
अनायास ही
चली आती है तू

 

और लिपट जाती है
कि रूह भी
मदहोसी से
खो जाती है कही

 

ओर अनायास ही
यु चली जाती हे तू
बिना कुछ कहे , कही

 

 

 

कपिल कुमार परमार

 

 

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