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लोग जिँदा हो जाते हैँ

 

 

कोई गाली नहीँ देता
कोई मजाक नहीँ उड़ाता
हर कोई करता है प्रशंसा
बिना किसी भेदभाव के
बिना किसी प्रतियोगिता के
हर तरफ लोग
वाहवाही करते है।
बड़ी शिद्दत से
याद करते हैँ।
उम्र के आखिरी पड़ाव पर
लोग जिन्दा हो जाते हैँ।
अखबार, टेलीविजन हर जगह सिर्फ उन्हीँ की चर्चा।
हर शीश झुकता है श्रद्धा से।
देश का झंडा
झुकता है सम्मान मेँ।
पक्ष विपक्ष
हर कोई करता है नमन।
लोग जिन्दा हो जाते हैँ उम्र के आखिरी पड़ाव पर।

 

 

 

-मनीस पाण्डेय

 

 

 

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