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माँ का आतंकवादी


आतंकवादी
दूसरे जाति धरम के
लोगों में आतंक फैलाते हैं
मारते फिरते हैं
क्यों...?
वही जाने
उनका धर्म जाने।

 

माँ भी घर में
आतंकित है
भयभीत है
उन आतंकवादियों से नहीं
अपने बेटों से
अपनी कोक से जन्मे
अपने बेटों से।

 

नौ महीनों तक
प्राणों से अधिक रक्षा किए
भूखे पेट रहकर
वेदना सब सहकर
जिसे पाल पोसकर
बडा किया
खूब पसीना बहाया।

 

वही इस भूखे पेट में
अब रोटी नही डालता
भूल गया
पर मत भूल माँ अपनी जननी
नहीं तो
तू कहीं का था॥


- श्री सुनील कुमार परीट

 

 

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