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जाने कितने दिनो बाद , आज माँ के हांथो का खाना खाया है

 

 

यह वो खाना है , जिसमें अमृत समाया है !
जाने कितनो दिनो बाद यह मौका आया है
दाल , चावल , सब्ज़ी , रोटी और हलवा भी बनाया है !
माँ तूने बचपन में एक - एक कौर मुश्किल से खिलाया था
आंचल में अपने तूने दूध पिलाया था !
माँ किधर है वो नींबू का आचार
जिसके स्वाद का मामा जी करते थे प्रचार
कैसे थे वो दिन , क्यूं बदल गये विचार ?
कितने दिनो बाद आज माँ के हांथो का खाना आया है
यह वो खाना है , जिसमें अमृत समाया है
माँ किधर है वो आंवले का मुरब्बा
जिसका हरे कलर का था डब्बा
जाने कितने दिनो बाद आज मैने देशी घी ख़ाया है
यह वो खाना है , जिसमें अमृत समाया है !
ख्वाहिश मेरी यही है , यही खाना खाता जाऊं
ऋडी नही , भिकारी हूँ फिर भी कर्ज़ चुकता जाऊं
हो ईश्वर तुम , मानता हूँ
जिसमें ब्रह्माड समाया है
जाने कितने दिनो बाद , आज माँ के हांथो का खाना खाया है
यह वो खाना है , जिसमें अमृत समाया है !

 

 

 

Anurag Kumar Swami

 

 

 

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