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मिटा नक्सली नाम

 

संदेह नहीँ दुर्गम-पथ को सुलभ बनाया ,
पर्यावरण को जीवन को आधार बनाया ,
संदेह नहीँ हर जुवां पर आतंकवादी कहलाया ,
अंग्रेजी मानसिकता तेरे माथे पर ढ़ाया ,
हर लम्हा मेँ उत्तरदायी गरीबोँ को बनाया ।
संदेह नहीँ देशी शासकोँ तुम्हेँ रुलाया ,
तेरे अधिकार को जमा पूँजी बनाया ,
लेनिनवाद , माओवाद का नाम दुहराया ,
घर-घर मेँ नक्सलवाद का जहर फैलाया ,
तेरे हिस्सा छिन अपना महल बनबाया ,
संदेह नहीँ देश तुम्हेँ देश का दुश्मन बतलाया ।

 

आ पुरखोँ का बढ़ा सम्मान अपना अधिकार फिर पहचान ,
देशहित का कर गुनगान तब ही रहेगी तुम्हारी शान ,
जीवन अधर मेँ पड़ जायेगा जब तक तुम न बाहर आयेगा ,
संदेह नहीँ तुम बिन देश लुटा जायेगा ।

 

नव-जीवन को राह दिखा आदिमानव का कर्तव्य निभा ,
मुख्य धारा मेँ आयेगा सारा कष्ट मिट जायेगा ,
संदेह नहीँ तुम बिन हिन्दुस्तान बच पायेगा ।

 

 

 

संजय कुमार अविनाश

 

 

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