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नुनुवां की नानी माँ

 


सोते से
कोई नहीं उठाता अहले-सुबह
अब स्कूल के लिये

 

 

जबरन नास्ते में शामिल की
नहीं करता कोई खुशामद बार-बार

 

 

दरवाजे पर खड़ा
दिखता नहीं परेशां कोई कभी
टेम्पो आने की खबर पाकर पहले की तरह

 

 

चुटकी भर प्यार व
एक चुम्बन को तरस रहा
अर्से बाद पहली दफा
लोगों ने देखा भरी आँखों रोते नुनुवां को

 

 

ढरक रहे उसकी आँखों से
अविरल आँसु
और वह ढूँढ़ता जा रहा
चन्दामामा
विक्रम-बेताल
परियों की कहानी सुना-सुनाकर
प्रतिदिन अपने आगोश में
सुला जाने वाली
उस अच्छी-प्यारी,न्यारी नानी माँ को
बिना कहे छोड़ कर चली गई जो उसे.........!!!

 

 

वह चाह रहा जानना
मम्मी-पापा से
मौसी-मामा से
बिना कुछ कहे
कब -क्यूँ और कहां
चली गई नानी माँ ........?

 

 

बच्चे के सवाल से
कलप रही आत्माऐं सबकी
निरुत्तर सभी प्रश्नों की खड़ी श्रॅृखला से

 

 

किसे मालूम
अनायास छोड़कर सभी को
क्यूँ  और कहां चली गईं वे

 

 

एक साथ कई-कई चुप्पियों के
टूटने की आपसी जिरह के बीच
सवालात वहीं के वहीं धरे रहे फिर भी उसके

 

आप ही बतला दीजिए न
रुठकर आखिर कहां चली गईं नानी माँ ?
थक-हार कर नाना जी से ही अंतिम सवाल

 

 

क्या बतलावे कोई कि
अब नहीं रहीं इस पृथ्वी पर नुनुवां की नानी माँ .....!!!

 

 

कि निर्धारित वक्त से पूर्व ही
वे चाहती रही होगीं चली जाना छोड़कर
रोते-विलखते नुनुवां को
गुलशन के अन्य फूलों को

 

 

कि उपर वाले की यहि मर्जी रही होगी शायद.....!

 

कि वापस लौटेगीं जरुर
बच्चे के बचे चुम्बन के लिये

 

सब कुछ समझ चुका नुनुवां की
बातों को ही मानना पड़ा सच अंततः

 

 

रोते-रोते
थक-हार कर सोने की मुद्रा में
जो बुदबुदाता जा रहा था
जरुर आऐगीं एक दिन मेरी-प्यारी नानी माँ ...!!!

 

अमरेन्द्र सुमन

 

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