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नव वर्ष आया है

 

 

नव वर्ष आया है,
हर्ष लाया है।
दुःख-चिंता का पतन कर,
सुख-समृद्धि का उत्कर्ष लाया है।

 

प्रेम-बंधुत्व की गठरी में ,
पर्व समेटे भांति-भांति,
ईद,दिवाली,क्रिसमस,वैशाखी,
ओणम,ईस्टर और सक्रांति।
सब धर्मो के पर्व मनाना,
ये संदेशा लाया है।
नव वर्ष आया है,
हर्ष लाया है।

 

वर्ष बढ़ा है, उम्र बढ़ी है,
अब सोच बढ़ानी होगी,
बड़ी सोच से बड़ा नतीजा,
ये बात बतानी होगी।
सब धर्मो से बड़ा धर्म,
दिनेश ने मानवता को पाया है,
नव वर्ष आया है,
हर्ष लाया है।

 

वर्ष पुरातन से अनुभव पाया,
नूतन वर्ष में इसे लगाना है,
नए वर्ष में नयी आशाएं और नयी उपलब्धि पाना है।
शांति,सफलता और स्नेह को,
नया वर्ष ले आया है।

 

नव वर्ष आया है,
हर्ष लाया है,
दुःख-चिंता का पतन कर,
सुख-समृद्धि का उत्कर्ष लाया है।

 



 


दिनेश कुमार 'डीजे'

 

 

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