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पहेलियां

 

तेरी रहस्यमयी....
नील आंॅखों में
फैलती मायूसी
अनबूझ पहेली है ।
जाल बिछाती......
सुल्फों की जादुई
मृदु विद्युत-स्पर्श
अनबूझ पहेली है ।
स्पर्श-कातरता का
अनबुझ प्यास भी
आज फिर...
अनबूझ पहेली है ।

 

 

 

डा० टी० पी० शाजू

 

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