tarasingh
Administrator Dr. Srimati Tara Singh


www.swargvibha.in






पथिक

 

अपने हुनर से शख्स को शख्सियत बना ले,
कोई मिले अगर प्यासा तो खुद को दरिया बना ले I

 

मेरा जूनून ही काफी है मेरे सपनो के लिए,
मेहनत के परों से नयी उड़ान भर ले I

 

आसमान मेरी मंजिल नहीं बस एक पड़ाव है,
देखना है उस पार तो शिखर पर चढ़ कर देख ले I

 

वो समंदर ही क्या जिसमे तूफ़ान न हो,
है अगर सच्चा पथिक तो पथरीली राहों को पार कर ले I

 

है अगर काटें तो उसके दामन में फूल भी खिलते हैं,
राहें दुस्वारियों को चीर कर अपने हिस्से की खुशियाँ बटोर ले I

 

 

धनेन्द्र कुमार

 

 

HTML Comment Box is loading comments...