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पौधरोपण कीजिए

 

 

दोहा सलिला:

पौधरोपण कीजिए

संजीव

 

 

*

पौधारोपण कीजिए, शुद्ध हो सके वायु

जीवन जियें निरोग सब, मानव हो दीर्घायु

*

एक-एक ग्यारह हुए, विहँसे बारह मास

तेरह पग चलकर हरें, 'सलिल' सभी संत्रास

*

मैं-तुम मिल जब हम हुए, मंज़िल मिली समीप

हों अनेक जब एक तो, तम हरते बन दीप

*

चेतन जब चैतन्य हो, तब होता संजीव

अंतर्मन शतदल सदृश, खिल होता राजीव

*

विजय-पराजय से रहे, जब अंतर्मन दूर

प्रभु-कीर्तन पल-पल करे, श्वासों का संतूर

*

जब तक रीतेगा नहीं, आकांक्षा का कोष

जब तक पायेगा नहीं, अंतर्मन संतोष

*

नित लाती है रवि-किरण, दिनकर का पैगाम

लाली आती उषा के, गालों पर सुन नाम

*

आशीषों की रोटरी, कोशिश की हो राह

वाह परिश्रम की करें, मन में पले न डाह

*

अंकुर पल्लव पौध ही, बढ़ बनते उद्यान

संरक्षण पा ओषजन, से दें जीवन दान

 

 

संजीव ‘सलिल’

 

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