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अमृत संजीवन प्रेमसुधा

 

 

अमृत संजीवन प्रेमसुधा,
करते रहिये सेवन सदा।
मन की कचाई कट जायेगी,
भूख प्यार की जग जायेगी।
अपनेपन का भाव जगेगा,
जलन द्देष की मिट जायेगी।
मन की कुंठा होगी दूर-
सुखी रहोगे सर्वदा............ अमृत संजीवन............ ।
प्रेम सब रोगों की दवा रामवाण,
होता है पुलकित तन सुखी प्राण।
मन की पीड़ा हट जाती है,
कष्टों से मिलता है त्राण।
सुखमय जीवन हो जाता है,
रहता है खुशियों से लदाफदा............ अमृत संजीवन............ ।
प्यार में हरपल सुहाना लगता है,
हर बेगाना अपना लगता है।
बिना प्यार के यह जीवन-
बड़ा डराना लगता है।
प्यार करोगे प्यार मिलेगा-
सृष्टि लगेगी सुखप्रदा............ अमृत संजीवन............ ।
जो तेरा वह मेरा है,
जो मेरा वह तेरा है।
सबकुछ है यह श्री राम का-
ना तेरा ना मेरा है।
भाव यह मन में आते ही,
धन की मिट जायेगी क्षुदा............ अमृत संजीवन............ ।

 

 


जयन्ती प्रसाद शर्मा

 

 

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