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पुकार

 

 

क्यों रुके हैं कदम वो मेरी राहे डगर कहाँ है
इन थमे पलों में वो बात वो मंज़र कहाँ है
सजा रखे थे जो मैंने वो मेरे ख्वाबों का समुन्दर कहाँ है

 

 

इस अधूरेपन का कोई राज बता दे
मन की हलचल का अंदाज़ समझा दे
थाम के हाथ कोई रास्ता दिखा दे
ठन्डे पड़े जूनून को फिर से पिघला दे
वो साथी वो मेरा हमसफ़र कहाँ है
इन थमे पलों में वो बात वो मंज़र कहाँ है

 

 

क्यों ये राहें मेरी अपनी सी नहीं लगती
इन बरसातों में वो संतोष वो ख़ुशी नहीं लगती
ये दुनियादारी की बातें सच्ची नहीं लगती
झूठी सी ज़िन्दगी ये अच्छी नहीं लगती
जो देदे सुकूँ मुझे वो मेरा रहबर कहाँ है
इन थमे पलों में वो बात वो मंज़र कहाँ है

 

 

मेरे खुदा बस इतनी इल्तज़ा है
बता दे मुझे ये कैसी सजा है
क्यों इंसान खिलोने बस दौलत मज़ा है
कहाँ है वो अच्छाई कहाँ वो अदा है
जहाँ रहता है तू वो तेरा घर कहाँ है
इन थमे पलों में वो बात वो मंज़र कहाँ है
सजा रखे थे जो मैंने वो मेरे ख्वाबों का समुन्दर कहाँ है

 

 

 

 

........Ayushi Gupta

 

 

 

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