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समझ स्वाभिमान

 

 

ऐ मानवों क्यों कलयुग को बदनाम किया
त्रेतायुग ,द्वापरयुग , था इसी तरह
सत्ययुग ,
क्यों चट्टानों से कलयुग को दबा दिया !
गुरु द्रोण ने भूल गया अपनापन ,
पितामह बन बैठे अनजान ,
तू क्यों नारी को कर रहा अपमान !

 

दुह्शासन तो बड़ों का किया
मर्यादा
दुर्योधन जैसे दानवों का बना
प्यादा ,
ध्रितराष्ट ने अंधों का सम्मान
बढाया
तू क्यों नारी को निचा गिराया!

 

भड़ी सभा
में शकुनी भरा मुश्कान
गंधार कुल का बढाया शान ,
कर्ण , दुर्योधन , दुह्शासन था
बलवान
तू क्यों मान रहे हो पहलवान !

 

मत बन नारी को हारने वाला
गदाधर, धनुर्धर , कहलाने वाला
,
पांडवों तो कौरवों का दासी
बना
तू किस देश का बासी माना !

 

धिक्कार उस मानव तन को
आजाद कहलाना मन को ,
बिना हारे हार गया जन को !
त्रेता का रावन रह न सका ,
द्वापर में कृष्ण से बच न सका,


भू- पर आग लगान�

 

 

 

 

written by संजय कुमार

 

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