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सीमा पर इंसान

 

पीछे मुड़ कर देख इंसान की फितरत
गुलामी की जंजीर को तोड़ा
गुनाहगारोँ को नरक से जोड़ा
खड़े सीमा पर देश को मोड़ा
देश भक्त का फर्ज निभाया ,
मां बहनो को आंसू से भिगाया
हर लम्हेँ मेँ देश को बचाया ,
मां की शान शहीद होकर बढ़ाया ,
निर्भय शक्ति आंचल को बचाया ।

 

खुदीराम , तात्या , वीर भगत कहलाया ,
अब संभल जा इंसानोँ की संतान ,
मत कर लुटेरोँ का सम्मान ,
जालियावाला वाग दुहरायेगा
अपना ही खून तड़पायेगा ।
धरा की अरमान सजानी होगी ,
देश खातिर कुर्बानी निभानी होगी ,
अरबोँ मन बाट जोह रही है ,
भूखे नंगे यूँ सो रहे हैँ ।

 

जाग , उठ , उर्जावान हो जला मशाल ,
देश खातिर कदम बढ़ा ,
धन दौलत को पीछे हटा ,
खून देने को शान समझ
खून लेने को मत भटक ।
ये ही मां की अरमान है ,
हिन्दुस्तानी संतान पर अभिमान है ,
पीछे मुड़ कर देख वैदिक संतान ,
कोटि शक्ति पर रहा विरान ,
ऊँची चोटी , हिम शिखर पर आज भी है विराजमान ।

 

 


संजय कुमार अविनाश

 

 

 

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