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हमारा शहर भोपाल

 

 

 

चोरी-चोरी,चुपके-चुपके,महताब का छिप जाना
धीरे-धीरे,मद्धम-मद्धम,आफ़ताब का निकल आना
होले-होले, चम-चम, चाँदनी का रोशनी में सिमट जाना
पिघल-पिघल,चमक-चमक,शबनम का चमचमाना
इश्क़-ए-झीलों की इबादत की नज़ाकत से बना है
हमारा शहर भोपाल मस्ताना......

 

मीठे-मीठे,सोणे-सोणे,सुरों विचे प्रकृति का गुनगुनाना
छन-छन,कन-कन,कुदरत का कामिनी सा झिलमिलाना
महक-महक,मंद-मंद फ़िज़ाओं का फुसफुसाना
सुर्ख़-सुर्ख़,मख़मली-मख़मली मौसम-ए-मयखाना
शरारती इश्क़, शराबी प्यार,शबाबी मोहब्बत से बना है
हमारा शहर भोपाल दीवाना......

 

गमक-गमक,ग़ुल-गुल,गुलो का गुलगुलाना
ज़ुल्फ़-ज़ुल्फ़,खिल-खिल कलियों का खिलखिलाना
लब-लब, लम्स-लम्स लड़कियों का सूफियों सा मुस्कराना
जिस्म-जिस्म,रूह-रूह,फ़रिश्तों का समा जाना
आँखों के परों,तितलियों के घरों,दिलों के दिल से बना है
हमारा शहर भोपाल सूफ़ियाना......

 

सूफ़द-सूफ़द, मरमरी-मरमरी,बादलों में तारों का टिमटिमाना
मंदिर-मंदिर,मस्ज़िद-मस्ज़िद,अजनों में आरतियों का घुल जाना
मन्नत-मन्नत,ज़न्नत-ज़न्नत ख़ुदाओं का जमी पर उतर आना
लफ़्ज़-लफ्ज़,नज़्म-नज़्म,नागमों सा नमाज़ी नज़राना
मियाँ के मिज़ाज,तारों के ताज़, नवाबी अंदाज़ से बना है
हमारा शहर भोपाल शायराना.......

 

मदहोश-मदहोश,सुरमई-सुरमई, रातों में लड़कों का फकरों सा बहक जाना
बावरी-बावरी,पगली-पगली,घुमकड़ सी गलियों में खो जाना
सलोनी-सलोनी,मतवाली-मतवाली,चाय की चुस्कियों का बहाना
नशिली-नशिली,शर्मीली-शर्मीली,बोटकल्ब की कस्तियों का मस्तियाना
भोज कि खोज,सूरमा भोपाली की मौज,मोती की मीनारों से बना है
हमारा शहर भोपाल महवारा......

 

 

प्रेषक
अक्षय भरद्वाज "आवारा"

 

 

 

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