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तेरे ढंग से

 

 

tere dhang

 

 

 

चलो आज फिर तेरे ढंग से जी कर भी देख लेते है ...
इस आज को हर रूप में तेरा करके आज जी लेते है ....
आज ना रहेगा तेरे मेरे बीच अभ कोई अफसोस या राज़ ……
हर बात में होगा सिर्फ उमंग और उमीदों के जज़्बात .....
चलो आज फिर तेरे ढंग से जी कर भी देख लेते है ...
हर राह तेरे संग अब चलकर भी देखेंगे ....
तेरे हर विश्वास पे अब हम विश्वास करके देखेंगे …
तेरे हर सपने को हम भी अपनी आँखों में अब बसाएंगे …
तेरे हर ख़ुशी में हम भी तेरे संग झूमेंगे …
तेरे हर गम को हम भी अब बाँट लेंगे …
चलो आज फिर तेरे ढंग से जी कर भी देख लेते है ...
तेरी इस दुनिया को अभ हम तेरे ढंग से ही देखेंगे …
तेरे इस आज को हम हर पल तेरे साथ हसकर अब जी लेंगे ..
चलो आज फिर तेरे ढंग से जी कर भी देख लेते है ...

 

 

कवित्री
संचिता

 

 

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