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सदीं का ठहराव

 

 

मण्डेला का निधन
या फिर सदीं का ठहराव
क्या कहें इसे
एक योद्धा
जो रहा अपराजेय
जिसने जीती हर बाजी
जीवन के हर छोर पर
संघर्षों का जमावड़ा
पर विचलित नहीं
चेहरे पर बच्चों-सी मासूम मुस्कान
हर बाजी से पहले ही जीत का विश्वास
मौत भी कईयों बार आयी
हारकर लौट गई
लगभग एक सदीं का विजेता
जो काफी लड़कर थका
आराम से हार नहीं मानी
मृत्यु को भी नाकों चने चबाना पड़ा
आखिर एक विजेता से सामना हुआ था
मण्डेला से हुआ था
चेहरे पर छुहारे-सी झुर्रियाँ लिए हुए
जीवन में हर क्षण आयी
हार को पिये हुए
मण्डेला ने हथियार डाल दिया
मृत्यु से समझौता हुआ
और मण्डेला शान के साथ
सम्पूर्ण विश्व की आँखें सजल किये हुए
मृत्यु के साथ उसके घर चले गए
अब बस मण्डेला की यादें हैं
आज एक बार फिर वो याद आये
और क्या खूब याद आये
मण्डेला तुम महान हो।

 

 

 

अमन चाँदपुरी

 

 

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