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तुम कलम

 

 

तुम कलम, कलाम
और कार्टून से
डरते हो।
बंदूक से डराना
चाहते हो?
तुम मूर्ख और
कायर हो!
उन्हेँ झुठलाना
चाहते हो,
जिन्होँने दुनिया को
प्यार और मानवता सिखायी।
वे कहते थे अपने
दुश्मनोँ से भी
प्यार करो।
अफसोस कि तुमने हजारोँ बार पैगम्बर
को मारा।
तुम वहसी
दरिन्दे हो।
लेकिन फिर भी
बेवकूफ हो।
विचार कभी
नहीँ मरते।

 

 

 

-मनीस पाण्डेय

 

 

 

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