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वो बात नहीं जो पहले थी

 

 

1-वो बात नहीं जो पहले थी,

जो है उनमे वो बात नही ,

अब वो कांटे नहीं जो चुभ सके,

जो बचे है उन्हें कोई अकेला ही ,

साफ कर रहा हो जैसे.

2-कही दूर रौशनी की एक किरण दिख रही है,

युग प्रवर्तक बन युग परिवर्तन करने,

कर्त्तव्यचुत हो कंटकाकीर्ण पथ पर,

कोई अकेले ही चल रहा हो जैसे .

3-दुर्भेद्य को धेय कर दुर्गम पथ ,

आप प्रशस्त करते हुए ,

दुर्दम्य सहस को कोई अकेला ही,

निस्तेज कर रहा हो जैसे .

4-राह की गंदगी को खिंचते हुए ,

अतीत की काली परछाइयों को,

समेटते हुए कोई अकेला ही ,

चला जा रहा हो जैसे.

5-

शूलपाणि बन सूल से अभ्र को भेदते हुए,

सूरज के सप्तरथ पे बैठ ,

सूरज की किरणों को साथ ले,

कोई धरती पर अकेला ही दौड़ा,

चला आ रहा हो जैसे.

 

 

 

Dharmendra Mishra

 

 

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