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यादें


इन यादों से कह दो आया न करें
दिल को दुःख मे डुबाया न करें
यादें दो शब्द है सिर्फ कहने को
सम्पूर्ण जीवन छिपा है इन दो शब्दों मे
वो बचपन के दिन
एक स्वपन सा प्रतीत होता है
वो माता-पिता का प्यार, आज भी याद है
वो टीचरों की डांट, सिखाती थी हमें राह
फ़िक्र न होना किसी बात का
सिर्फ मस्त रहना अपने ही धुन मे
एक स्वप्न सा प्रतीत होता है |
हजारों दोस्त मिलें पर साथ कोई नहीं
रह गई सिर्फ यादें उस पल की
जो बिताएं थे हमने कभी साथ
उस पल का एहसास
जो आज भी है दिल मे
हजारों रिश्तें है आज
पर आज भी अकेले है हम
दिल डूबा रहता है आज भी उसी एहसास मे
आखिर यही सोचतें रह जातें है दिल मे
काश फिर आ जाएँ वो बचपन के दिन
जो सतातें है हमें इन यादों के द्वारा |

 

 

Kaushal Panday

 

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