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यहीं कंहीं है

 

 

आओ चले देखें,
क्षितिज के उस पार ,
क्या है!
चलते-चलते थके पांव,
क्षितिज तो मिला ही नहीं,
जंहा से चले थे,
वहीं पंहुच गये पाँव
आओ चलो ढूंढ़े भगवान को ज़रा,
मन्दिरों मे ढ़ूंढ़ा,
मस्जिदो मे ढ़ूंढ़ा,
गुरुद्वारे मे न मिला,
न मिला चर्च मे कहीं,
क्षितिज की तरह कहीं,
वो भी भ्रम ही तो नहीं,
महसूस कर के देखो,
वो है यहीं कहीं

 

 

बीनू भटनागर  

 

 

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