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बाबू-ईंजन

 

 

- अंकुश्री

 

 


‘‘मेरा काम करवा लिया ?’’
‘‘नहीं ! आफिस में इतना आसानी से काम होता है ? खर्चा-वर्चा किये बिना - - -.’’
‘‘मैं बाबू को कल नास्ता-चाय तो कराया था.’’
‘‘सर, आपने बाबू को जो नास्ता-चाय कराया वह आपसे बात करने का उनका शुल्क हो गया - - -.’’
‘‘बात का शुल्क और काम का शुल्क - - - क्या मतलब ?’’
‘‘मतलब साफ है. बाबू ने आपसे बात की, उसका शुल्क नास्ता-चाय हुआ. लेकिन नास्ता-चाय के लिये बाबू कार्यालय से दुकान तक गये - इसमें उनका जो समय नुकसान हुआ, उसका शुल्क और अपने काम के लिये शुल्क तो आपने दिया नहीं .’’
‘‘- - - - - - -’’
‘‘बाबू ने कहा कि रैंजर साहेब आये तो थें, पर गाड़ी चलने के लिये कोयला, डीजल या बिजली - जो भी हो, लेकिन ईंधन तो चाहिये ही.’’
‘‘इसलिये बाबू को कुछ नगद देना होगा ?’’
‘‘आप जैसा समझें. लेकिन बिना ईंधन के रेल-ईंजन भले चल जाये, बाबू-ईंजन नहीं चलेगा,’’
‘‘ठीक है, कल बाबू-ईंजन में मोबील और पेट्रोल डाल आना - - -’’
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