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एक और हत्या

 

 

- अंकुश्री
‘‘ - - नहीं - - -.’’
‘‘मैं अच्छी तरह जानता हॅू. उसके बालों की तलाशी ली गयी है, चोटी नहीं मिली. उसकी छोटी-सी दाढ़ी देखने से भी वह - - - -.’’
‘‘लेकिन चोटी या दाढ़ी कोई सही पहचान नहीं है.’’
‘‘वह जनेऊ भी तो नहीं पहना हुआ है. अभी-अभी हमलोगों ने उसकी कमीज हटा कर देख ली है.’’
‘‘लेकिन जनेऊ उसकी अंतिम पहचान तो नहीं है. बहुत-से लोग जनेऊ नहीं पहनते हैं.’’
‘‘- - - - - -’’
‘‘तब तो यह हत्या भूल से हो गयी ?’’
‘‘अरे, छोड़ो ऐसी भूल को ! दंगा के समय यह हत्या हुई है. इसे लोग विरोधी गुट द्वारा कराई गयी हत्या ही करार देंगे और कहेंगे कि साम्प्रदायिक दंगे में एक और हत्या हो गयी.’’
‘‘- - - - - -’’

 

 

 

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