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जीवन

 

 

रेखा नाराज़ थी, ‘‘पिछले महीने ही तो मम्मीजी को आपने खून दिया था, एक महीने बाद ही झूठ बोलकर आज मेरे लिए फिर एक बोतल खून दे दिया, अपना भी तो ख्याल रखों।‘‘ नीहार बोला, ‘‘मेरा ख्याल रखने के लिए तुम दोनों हो ना, मुझे तो मम्मी का भी जीवन बचाना था, तुम्हारा भी, तुम दोनों स्वस्थ रहो, मां की सेवा करना मेरा कत्र्तव्य है, तुम्हें भी स्वस्थ रखना मेरा प्रेम है‘‘ रेखा भीगी पलकें पोंछ रही थी।

 

 

 

DILEEP BHATIA

 

 

 

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