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शोध

 

 

श्रीवास्तवजी के मित्र सलाह दे रहे थे, ‘‘शोध रिसर्च पी.एच.डी. से क्या मिलेगा? क्यों पैसा लगा रहे हो बेटी की रिसर्च में? नौकरी करवाते‘‘ श्रीवास्तवजी बोले, ‘‘बंधु नौकरी तो कभी भी कर लेगी, पी.एच.डी. की डिग्री तो उम्र भर कभी भी सहायक ही होगी, रिसर्च में लगा पैसा खर्च नहीं, निवेश है, पूंजी है, स्थायी सम्पत्ति है, मुझे गर्व है कि मेरी बेटी डा. मिली से पहचानी जाएगी।‘‘ पापा को सुनकर डा. मिली पलकें पोंछ रही थी।

 

 

 

DILEEP BHATIA

 

 

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