tarasingh
Administrator Dr. Srimati Tara Singh


www.swargvibha.in






 

 

तिलक

 

 

पुरूषोत्तमजी बोले, ‘‘संध्या तो आपकी बेटी समान है, परसों हम लड़के वालों के यहां तिलक का दस्तूर लेकर जा रहे हैं, आप तो परिवार के सदस्य समान हैं, चलना ही है।‘‘ राजकिशोर बोले, ‘‘जी, मुझे गरीबों के यहां जाकर रहने खाने के लिए भार नहीं बनना‘‘ पुरूषोत्तम बोले, ‘‘पर उनका तो करोड़ों का व्यापार है, गरीब कैसे?‘‘ राज किशोर बोले, ‘‘इतना होते हुए भी तिलक में 11 लाख रूपए नगद मांग रहे हैं, मांगने वाला गरीब ही होता हैं।‘‘

 

 

DILEEP BHATIA

 

 

 

HTML Comment Box is loading comments...